परिमेय संख्या किसे कहते हैं Rational Number In Hindi

Parimey Sankhya Kise Kahate Hain

Parimey sankhya kise kahate hain हेलो, दोस्तों आज हम परिमेय संख्या के बारेमे जानने वाले हैं की आखिर परिमेय संख्या किसे कहते हैं। दोस्तों संख्या के भी कुछ प्रकार है। उसमे से परिमेय भी एक संख्या का प्रकार है।

Parimey Sankhya Kise Kahate Hain
Parimey Sankhya Kise Kahate Hain

गणित में परिमेय संख्या का स्थान भी अच्छा खासा है। परिमेय संख्या को इंग्लिश में रैशनल नंबंर कहते हैं। (Rational Number)

परिमेय संख्या की परिभाषा

व्यावहारिक जीवन में हम परिमेय संख्या का बहुत कम उपयोग करते है। में आपको बहुत ही सिंपल भाषा में परिमेय की व्याख्या यानी परिभाषा देने जा रहा हु जिससे आप बड़ी आसानी से समज सकेंगे की आखिर परिमेय संख्या क्या है।

सबसे पहले तो पूर्णांक संख्या के बारेमे जान ले। व्यावहारिक जीवन में उपयोगी पूर्ण संख्या जैसे की दो, तिस वगेरा जीरो को छोड़ के।

परिभाषा: अब ऐसी पूर्णांक संख्या को हम p/q रूप में लिख सके और जहा पे q=0 नहीं होना चाहिए, तो ऐसी संख्या को परिमेय संख्या कहा जाता है।

अब p/q में q जो है वो 0 नहीं होना चाहिए। p/q यानी 2/3 यह p/q का रूप हो गया इसमें 3 की जगह पे कभी 0 नहीं होना चाहिए।

परिमेय संख्या के उदाहरण

  • 2/3

परिमेय संख्या को निचे मुजब दर्शाते है।

Parimey Sankhya Kise Kahate Hain

परिमेय संख्या महत्वपूर्ण

सभी भिन्न परिमेय संख्या कहलाती है।

  • भिन्न यानी जिसका बटवारा हो सके। तो इस तरह की तमाम भिन्न संख्याये परिमेय संख्या कहलाती हैं।
  • जैसे की 2/3, 4/2, -3/5 , 7/4 , -2/-3 वगेरा।

सभी परिमेय संख्या भिन्न नहीं कहलाती है

  • यहां पे दोस्तों सभी परिमेय संख्या भिन्न नहीं कहलाती है। भिन्न यानी जिसका बटवारा हो सके जैसे की 4/2 तो यहां पे यह भिन्न संख्या है यह परिमेय भी है।
  • लेकिन, -4/2 यह संख्या परिमेय तो है लेकिन भिन्न नहीं है क्यों की इसका बटवारा नहीं हो सकता। यहां पे 4 जो है वो रुणांक संख्या है। -4 जिसके भाग नहीं हो सकता।

0 परिमेय संख्या है

  • दोस्तों, 0 को हम परिमेय संख्या कह सकते है। यहां पे p/q में q=0 नहीं होना चाइये, लेकिन p=0 सकता है।
  • जैसे की 0/1, 0/7 वगेरा।

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परिमेय संख्या के गुणधर्म

  • योग के अंतर्गत संवृत- परिमेय संख्याए योग के अंतगर्त संवृत होती है।
  • व्यवकलन के अंतर्गत संवृत- परिमेय संख्याए व्यवकलन के अंतगर्त संवृत होती है।
  • भाग के अंतर्गत संवृत- परिमेय संख्याए भाग के अंतगर्त संवृत होती है।
  • परिमेय संख्याओं के लिए परिमेय संख्या शून्य योज्य तत्समक है।
  • परिमेय संख्याओं के लिए परिमेय संख्या 1 गुणनात्मक तत्समक है।
  • परिमेय संख्याओं के लिए योग और गुणन की संक्रियाएँ
  • परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित किया जा सकता है।
  • दी हुई दो परिमेय संख्याओं के मध्य अपरिमित परिमेय संख्याएँ होती हैं। दो परिमेय संख्याओं के मध्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने में माध्य की अवधारणा सहायक है।

Conculsion

Parimey sankhya kise kahate hain यह आप अच्छे से समज गए होंगे। दोस्तों परिमेय संख्या की तरह ही अपरिमेय, पूर्णाक, अपूर्णांक जैसे कई संख्या के प्रकार है हमे स्पर्धात्मक एक्साम्स में और अपने गणित में अच्छे मार्क्स प्राप्त करने के लिए सीखना जरुरी है।

धन्यवाद

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